मनमोहन सिंह
शिवालिक की पर्वत श्रृंखला की गोद में बस छोटा सा गांव कुमारहट्टी जैसे बैडमिंटन के रंग में रंग गया है। हर दुकान हर घर में लोग केवल बैडमिंटन की चर्चा कर रहे हैं। कारण है तीसरी राजा वीरभद्र सिंह स्मारक बैडमिंटन प्रतियोगिता जो 25 सितंबर से 28 सितंबर तक राजा वीरभद्र सिंह स्मारक खेल परिसर में खेली जाएगी। प्रतियोगिता शुरू होने में अभी सात दिन हैं पर मिली जानकारी के अनुसार कुमारहट्टी, धर्मपुर, बड़ोग, कसौली और सोलन के अधिकतर होटल बुक हो चुके हैं।
इन मुकाबलों में हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, केरल, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, और उत्तर- पूरब से 400 से अधिक खिलाड़ियों के भाग लेने की संभावना है। आयोजन समिति के अध्यक्ष रमेश चौहान इसे लेकर बहुत उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की प्रविष्ठियां जितनी तेजी से आ रही हैं वह देश भर के खिलाड़ियों के जोश को दिखाता है। उनका कहना है कि प्रविष्ठियां लेने की अंतिम तिथि 20 सितंबर है, उससे पहले भाग लेने वाले खिलाड़ियों की पूरी गिनती बताना कठिन है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित इस टूर्नामेंट में जूनियर, सब जूनियर वर्ग के खिलाड़ियों के अलावा मास्टर्स खिलाड़ियों के मुकाबले होंगे। इनमें 11 साल से ऊपर के बच्चे और 35 साल से ऊपर के पुरुष और महिला खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।
इस बार विजेताओं को लगभग दो लाख रुपए नकद पुरस्कार के रूप में दिए जाएंगे। इस अतिरिक्त सभी खिलाड़ियों को एक एक टी- शर्ट और एक-एक मेडल स्मृति चिन्ह के रूप में दिया जाएगा। खिलाड़ियों के लिए तीनों समय के खाने की व्यवस्था आयोजकों की तरफ से की गई है। रमेश चौहान ने बताया कि इसके अलावा सभी प्रतिभागियों को एक एक सर्प्राइज गिफ्ट भी दिया जाएगा जिसका खुलासा बाद में होगा।
इस प्रतियोगिता के लिए एक कोर्ट में लगभग दो लाख की लागत से एक नई टर्फ बिछाई गई है और कुछ नई लाइट्स भी लगी है। यह उमड़ने वाली दर्शकों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए 1500 लोगों के बैठने का इंतज़ाम बैडमिंटन हाल में किया गया है।
यहां आने वाले खिलाड़ियों को डगशाई, कसौली, धर्मपुर, धारों की धार की बुलंद चोटी, बनासर का किला, शिवजी के कुछ मंदिर, और रमणीक स्थलों को देखने के साथ साथ कुमारहट्टी से टॉय ट्रेन का आनंद लेने का अवसर भी मिलेगा। यहां से थोड़ी दूरी पर महिलाओं द्वारा चलाई जा रही ‘शी’ हाट पर पहाड़ के पारंपरिक व्यंजन खाने को भी मिलेंगे।
बस कुमारहट्टी को इंतज़ार है अपने मेहमानों का।




